अस्तित्व

जीवन के इस उपवन में

भांति-भांति के फूल खिले

कुछ लाल चटक और हरे भरे

हर्षित पीले,  कुछ नम नीले|

 

कुछ मधु कुछ-विष गर्भ भरे

वो भंवरों को बहकाते हैं

मध-मद-मस्त भ्रमर नादाँ

जा कंटक से भिड जाते हैं|

 

‘पर’ भले द्वंद्व  में छिल जायें

वो तनिक नहीं घबराते हैं

अस्तित्व समर में भ्रमर -पुष्प

एक दूजे में मिल जाते हैं!

 

 

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