तुम

यूँ ही तुम सदा मुस्कुराती रहो तराने ज़िन्दगी के हंस के गुनगुनाती रहो ग़म-ए-दुनिया के बोझ तले कितने अनगिनत हैं दबे, कुचले माटी के पुतले, सब काठ… Read more “तुम”

रचना

वो गुलाब की पंखुड़ियों से सुन्दर सरसों  की लड़ियों सी झरझर झरना उसकी मुस्कान मन में छेड़े एक मधुर तान   मदमस्त हवा सी बहती वो मुझ… Read more “रचना”